9 ग्रह × 12 भाव — 108 ग्रह-स्थान संयोजन
वैदिक ज्योतिष — ग्रह और भाव का संपूर्ण विश्लेषण
वैदिक कुंडली के 9 ग्रह जब 12 भावों में होते हैं तो जातक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है — 108 विस्तृत संयोजनों का संपूर्ण मार्गदर्शन।
ग्रह चुनें — Choose a Planet
सूर्य
(Sun)आत्मा, पिता, प्रभुत्व, सरकार, स्वास्थ्य
Soul, Father, Authority, Government, Health
चंद्र
(Moon)मन, माता, भावनाएं, अंतर्ज्ञान, प्रजनन
Mind, Mother, Emotions, Intuition, Fertility
मंगल
(Mars)साहस, भाई-बहन, संपत्ति, ऊर्जा, शल्यक्रिया
Courage, Siblings, Property, Energy, Surgery
बुध
(Mercury)बुद्धि, संचार, व्यापार, शिक्षा
Intelligence, Communication, Business, Education
बृहस्पति
(Jupiter)ज्ञान, धन, पति, संतान, गुरु
Wisdom, Wealth, Husband (for females), Children, Guru
शुक्र
(Venus)प्रेम, विवाह, सौंदर्य, विलासिता, कला, पत्नी
Love, Marriage, Beauty, Luxury, Arts, Wife (for males)
शनि
(Saturn)कर्म, अनुशासन, दीर्घायु, सेवा, विलंब
Karma, Discipline, Longevity, Service, Delays
राहु
(Rahu)भ्रम, विदेश, तकनीक, महत्वाकांक्षा, जुनून
Illusion, Foreign, Technology, Ambition, Obsession
केतु
(Ketu)आध्यात्मिकता, मोक्ष, पूर्व जन्म, वैराग्य, रहस्यवाद
Spirituality, Liberation, Past Life, Detachment, Psychic
सभी 108 संयोजन — Quick Navigation
| ग्रह ↓ / भाव → | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ☉ सूर्य | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ☽ चंद्र | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ♂ मंगल | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ☿ बुध | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ♃ बृहस्पति | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ♀ शुक्र | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ♄ शनि | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ☊ राहु | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
| ☋ केतु | भ१ | भ२ | भ३ | भ४ | भ५ | भ६ | भ७ | भ८ | भ९ | भ१० | भ११ | भ१२ |
भाव में ग्रह का महत्व — Why Placements Matter
वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह एक विशेष ब्रह्मांडीय ऊर्जा है। जब यह ऊर्जा किसी विशेष भाव से गुजरती है, तो यह उस भाव के फल को प्रभावित करती है।
ग्रह की प्राकृतिक प्रकृति, भाव का उद्देश्य और ग्रह की बल के आधार पर इसका प्रभाव शुभ या अशुभ हो सकता है। उदाहरण के लिए, बृहस्पति (शुभ ग्रह) जब पंचम भाव (संतान, विद्या, बुद्धि) में होते हैं तो ज्ञान, संतान सुख और विद्या में उत्कृष्टता प्रदान करते हैं।